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“गीता” : एक ‘मानवीय ग्रंथ’ … एक ‘समग्र जीवन दर्शन’ … व ‘मानव समाज की अप्रतिम धरोहर’

            "गीता” का शाब्दिक अर्थ केवल गीत अर्थात् जो गाया जा सके से लिया जाता है । किन्तु आतंरिक रूप से इसका अर्थ है कि जिस...

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Friday, 1 May 2015

खानदानी लुटेरे

खानदानी लुटेरे

खानदानी शाही दवाखाने किसी के लिए नयी चीज नहीं हैं ,..जो शाही हैं वो खानदानी होते ही हैं ,..उनके दादा नाना से लेकर आने वाली औलादों तक सब नए नुस्खे ईजाद करते रहते हैं ,..दवाई से मरीज मरते रहें इनको कोई फर्क नहीं पड़ता ,..जब तक पुराने मरीज निपटते है तब तक नयी बीमारिया पैदा कर उसके शर्तिया ईलाज का दावा ठोक देते हैं ,..जनता फिरसे लाइन में लग जाती है …………………………………………………………………………………………… इस शाही खानदान की तारीफ ठीक से करने योग्य तो नहीं हूँ ,….फिर भी कोशिश करता हूँ !!!………..फूट डालकर गद्दी बचाए रखने की कला इस खानदान को अंग्रेज ठीक से सिखा गए थे ,.. .इस खानदानी दवाखाने का संस्थापक जब गुलाब का फूल थामे अंग्रेजन के कमरे से निकला तो बच्चों ने देख लिया और शोर मचा दिया ,..अंग्रेजन चालू थी ..तुरंत बच्चों को समझा दिया, ये तो चाचा हैं,..तब से बच्चा किसी का भी हो चाचा वही है ,..इसी चाचे ने पता नहीं अंग्रेजों से क्या समझौता किया कि देश की जनता महान स्वतंत्रता सेनानी सुभाष चन्द्र बोस तक को भूल गयी ,….सत्ता हंस्तान्तरण के समय दिल्ली की गद्दी पर बैठने की ऐसी धुन चढ़ी कि, हिन्दुस्तान के टुकडे हो गए लेकिन बन्दे को कोई फर्क नहीं पड़ा ,….कश्मीर की बात आई तो चाचे ने लौहपुरुष को पीछे करते हुए कहा ,…”वहां का मौसम ठंडा होता है ..मुझे वहां आशिकी का बहुत अनुभव है…वहां का ईलाज मैं करूंगा !! ,..” .नतीजा. नासूर सबके सामने है ,.. फिर इन्होने पंचशील नामक दवा का आविष्कार किया ,…उसका नतीजा आज का हिन्दुस्तान भूल गया ,…देश के हजारों वीर जवान शहीद हो गए ,.जमीन छिन गयी ,.. चाचा जी ने दिल्ली में दो आंसू टपका दिए और देशभक्ति साबित कर दी ,..किसी की मजाल नहीं हुई जो उंगली उठाये !………….काबिल चेले चपाटों को आगे बढ़ा चाचा ने अपनी राह निष्कंटक बना ली ,….. कालांतर में उनकी बेटी ने दवाखाना संभाला ,..जितने भी खानदान विरोधी थे सबको निपटा दिया …जहाँ तक नजर उठाओ दरबार में सिर्फ गुलाम चमचे ही नजर आते थे,…वैसे नजर उठाने की हिम्मत ही किसकी थी ,..इन्होने गरीब मार दवाई का भी आविष्कार किया ,..बहुत कामयाब नुस्खा निकला ,…कोई गरीब नेता बचा ही नहीं !,….दुर्गा बनने का ऐसा भूत सवार हुआ कि मुक्तिवाहिनी बना दी ,..फिरसे हजारों वीर जवान शहीद हुए,.. माताओं बहनों के आंसुओं की नीलामी इन्होने शिमला में की ,.जहाँ बिना अपना कश्मीर लिए सबकुछ दान दे दिया ,..जो बीमारी ख़त्म हो सकती थी ,..इस शाही खानदान ने उसे नासूर बना कर ही दम लिया !!! ………एक बार कुछ लोगों ने विरोध में आवाज बुलंद की ….उसको निर्दयता से दबा दिया ,..कहा इमरजेंसी है …तगड़ा ईलाज करना होगा !,………पंजाब में बीमारी के विषाणु फैलाये फिर ईलाज इतना कड़वा किया कि अभी तक पूरा दर्द नहीं मिट सका !!…….इनके एक वारिस बेचारे जहाज उड़ाते उड़ाते नीचे गिर गए…….दुःख तो हुआ होगा ,.लेकिन बुद्धिमता से काम लेते हुए इतना भी नहीं पता लगाया कि उसमें आग क्यों नहीं लगी ?……शायद उनको अंदाजा रहा होगा कि पेट्रोल होता तो आग लगती !!…… इनके बाद इनके बेटे ने गद्दी संभाली ,….बीमार जनता ने हाथों हाथ लिया ,…साफगोई से देश को बताया कि ..” जो हम देते हैं उसका चार आना ही तुमको मिलता है !! “…बाद में हिसाबी चमचों ने समझाया होगा भैया पचास पैसा फिरसे अपने ही घर वापस आता है ,..उसके बाद यह बात इनके मुह से दुबारा कभी नहीं निकली ,..मस्त होकर दवाखाना चलाते रहे ,..खजाना भरता रहा ,….संभालने के लिए स्विस बैंक थे ही ….. इनके बाद इनकी विदेशी बेगम ने दवाखाना संभाला ,….गद्दी पर बैठने ही वाली थी कि महामहिम ने नागरिकता का सवाल पूछ लिया ,….कोई और रास्ता न देख इन्होने चरण पादुका सबसे ज्यादा वफादार मोहन लाल को थमा दी और खुद त्याग की देवी बन गयी ,…मोहन की गद्दी के बराबर एक नयी गद्दी बना राजमाता नयी बीमारियाँ और उनकी दवाएं ईजाद करने लगी……साथ साथ मूर्ख युवराज को आगे बढ़ाने लगी ,…कुछ शातिर लोगों को उसकी ट्रेनिंग का जिम्मा दिया गया ,……अब पूरा देश इस शाही खानदान द्वारा पैदा कि गयी बीमारीओं कि चपेट में है ,….वैसे तो मोहन लाचार है,. उसको कुछ पता ही नहीं ,……लेकिन जब विदेशी फायदे की बात आती है तो शायद उसको दो-चार चम्मच शेरनी का दूध पिला दिया जाता है ,…थोड़ी ताकत आ जाती है ..जैसे-तैसे एक दहाड़ तो निकल ही जाती है .. अब मूरख युवराज पूरा शातिर बन चूका है ,..समझ गया है कि जब चमचे चाट कर साफ़ कर देते हैं तो धोना क्यों ?….जहाँ उसके दवाखाने बंद हो गए , वहीँ जाकर विधवा विलाप करता है ,..नए नए तरीके सीखे हैं ,..उसे अपनी समझदारी से ज्यादा मरीजों की मूर्खता पर यकीन है ,…..मरीज कहेगा कि खांसी आ रही है तो वो जुलाब की गोली देने को कहता है ,….मरीज खांसने से पहले सौ बार सोचेगा ,…खांसे भी तो अन्दर ही अन्दर ,…जोर लगाया तो फिसलने का डर होगा ,..और ये जानता है कि डर बड़ी चीज है ,….अब इसने एक नयी बीमारी ईजाद की है ,..हिन्दू आतंकी नामक खयाली वायरस का खौफ दिखाकर फिरसे अपनी दवाई मुहमांगी कीमत पर बेचने को तैयार है ,..इसके कई फायदे हैं ,..एक तो इस वायरस के डर से बचे खुचे हिन्दू ईसाई बन जायेंगे दूसरा शाही दवाखाने का खजाना किसी के हाथ नहीं आएगा बल्कि दिन दूनी रात चौगुनी बढेगा ,…… तो मेरे खानदानी मूर्ख देशवासिओं ,..आओ हम अपनी सभी लाइलाज बीमारीओं और चारों तरफ से खतरनाक तरीके से घिरते देश की आन बान और शान की चिंता छोड़ इस गाँधी के कंधे में अपना कन्धा मिलाते रहें ,…..क्योंकि …..अब राज करेगा शातिर गाँधी … वन्देमातरम.... कुछ शब्द नेहरू के लिए - मोदी जी के निजी जीवन पर उंगली उठाने वालों ....कभी पता किया है कि यह जद्दनबाई कौन थी ..? उस जद्दनबाई का मकान नंबर ७७ मीरगंज इलाहाबाद से क्या सम्बन्ध था जिसे मोतीलाल नेहरू चलाते थे उस जद्दनबाई का वी पी सिंह नर्गिस और सुरैया से क्या सम्बन्ध था ..?? क्या वही जद्दनबाई वी पी सिंह की माँ नहीं थी जिसके तीन निकाह हुए थे..?? पहला निकाह नरोत्तमदास खत्री से जो बाद में मियां बन गया जिसे लोग बच्ची बाबू कहते थे दूसरा निकाह उस्ताद मीर खान से जिससे फिल्म एक्टर अनवर हुसैन पैदा हुए तीसरा निकाह उत्तमचंद मोहनचंद से जिसे लोग मोहन बाबू कहते थे जो मियां बन गए जिसका नाम अब्दुल रशीद हो गया वही अब्दुल रशीद जिसने आर्य समाज के स्वामी श्रद्धानन्द जी को छुरा घोंप कर मार डाला था . बनारस की एक कोठेवाली दलीपाबाई पंडित मोतीलाल नेहरू की वैसीवाली पत्नी थीं. दलीपाबाई की पुत्री जद्दनबाई दुनिया की पहली महिला संगीतकार-गायिका थीं जिन्होंने फिल्मों में संगीत दिया. जद्दनबाई नें कई शादियां की होंगी लेकिन उनका पहला प्यार उत्तमचन्द मोहनचंद्जी थे जो कि एक डॉक्टर थे और जद्दनबाई से शादी करके अब्दुल रशीद बन गये थे. इसी शादी से जो तीन बच्चे हुए उनमें सबसे बडी का नाम उन्होंने फ़ातिमा ए.रशीद रखा. यही फातिमा आगे चलकर नरगिस नाम से मशहूर हुईं और थोडा और आगे जाने पर कॉंग्रेस सांसद स्वर्गीय सुनील दत्त की पत्नी बनीं थोडा और आगे जाने पर संजय दत्त की मां बनीं. मोती लाल नेहरु के परिवार को? मोती लाल नेहरु के एक पत्नी और चार अन्य अवेध्य पत्नियाँ थीं. ====================================== (१) श्रीमती स्वरुप कुमारी बक्शी (विवाहिता पत्नी )- से दो संतानें थीं श्रीमती कृष्णा w/o श्री जय सुख लाल हाथी (पूर्व राज्यपाल ). श्रीमती विजय लक्ष्मी पंडित w/o श्री आर.एस.पंडित (पूर्व. राजदूत रूस ) २) रहमान बाई - जिसका बचपन का नाम थुस्सू था ..जो कश्मीर से लाई गयी .. से श्री जवाहरलाल नेहरु - श्रीमती इंदिरा गाँधी -जिसका नाम मेमुना बेगम था श्रीमती इंदिरा गाँधी -जिसका नाम मेमुना बेगम से तीन पुत्र पहला राजीव गांधी... जिसे फिरोज खान उर्फ़ फिरोज घेन्दी ..गाँधी नहीं घेन्दी से पैदा हुआ मानते हैं दूसरा संजीव .. जो मुहम्मद युनुस से तीसरा आदिल शहरयार .. जिसे भोपाल गैस दुर्घटना के बाद एंडरसन के बदले अमेरिका की जेल से छुडवाया गया (३) श्रीमती मंजरी से श्री मेहरअली सोख्ता (प्रसिद्द आर्य समाजी नेता ) (४) ईरान की वेश्या से मो.अली जिन्ना जिसे पाकिस्तान मिला (५ )घर की नौकरानी (रसोइया ) से शेख अब्दुल्ला (कश्मीर के मुख्यमंत्री) अंग्रेजों ने इस भारत नाम के हिन्दू देश को तीन मुस्लिम देशों में बंट दिया .. तीनों का उर्दू नाम रख दिया .. ट्रांसफर ऑफ पवार एग्रीमेंट के द्वार झूठी आजादी दे दी .. साभार जॉन मथाईकी आत्मकथा से ( जवाहरलालनेहरु के व्यक्तिगत सचिव ).

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