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यादें

यादों का क्या है किसी भी पल ज़हन के द्वार खटखटा देती हैं न सोचती समझती विचारती न ही संकोच करती हैं बिन बुलाए मेहमां सी देहलीज़ पर ...

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भारतवर्ष


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