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Saturday, 26 September 2015

सौर्यउर्जा के प्रयोग का प्रचलन बढ़ा-- विकास की झलक ?

सौर्यउर्जा के प्रयोग का प्रचलन बढ़ा-- विकास की झलक ?

बिहार में मोबाइल एंटीनाImage copyright
बिहार के पश्चिम चंपारण ज़िले का दोन इलाक़ा बाल्मीकि टाइगर रिजर्व का हिस्सा है. थारू आदिवासी बहुल इस इलाक़े की दो पंचायतों के तहत 25 गांव आते हैं.
ये गांव यूँ तो दूसरे गांवों की ही तरह हैं, लेकिन जो चीज़ आकर्षित करती है वो है घरों में लगे ऊँचे एंटीने.
ये गांव हिमालय की शिवालिक पर्वत शृंखला के सोमेश्वर पहाड़ों के बीच बसे हैं. इन गांवों में बांस पर एक तय ऊंचाई पर लगे एंटीना के ज़रिए ही मोबाइल नेटवर्क मिलता है.

जुगाड़ तकनीक

बिहार में मोबाइल एंटीनाImage copyright
एंटीना काम कैसे करता है? इस बारे में बेथानी दोन के रोहित महतो बताते हैं, ‘‘एंटीना से लगे तार का एक सिरा घर के अंदर रहता है. मोबाइल को तार के इस सिरे से लपेट कर रखने पर कामचलाऊ नेटवर्क मिल जाता है.’’
इस जुगाड़ तकनीक के कारण इलाक़े में मोबाइल भी लैंडलाइन की तरह ही इस्तेमाल हो रहा है.
गोबरहिया दोन के रामविनय काजी यह परेशानी कुछ इस तरह बयान करते हैं, ‘‘एंटीना पर निर्भर रहने के कारण पाॅकेट में रखने वाला मोबाइल घर में ही पड़ा रहता है.’’
एल्यूमीनियम के छड़ों से बने ऐसे एंटीना की कीमत करीब पांच से सात सौ रुपए होती है. यह इलाक़े के लोगों को रामनगर और हरनाटांड के बाज़ारों में आसानी से मिल जाता है.

इंटरनेट नहीं

बिहार में मोबाइल एंटीनाImage copyright
इस एंटीना के जरिए भी केवल बात-चीत ही हो पाती है. इंटरनेट का नेटवर्क नहीं मिल पाता है.
ऐसे में यहां के लोग, खासकर युवा सोशल साइट्स और दूसरी वेबसाइट्स की जानकारी होने के बाद भी इनका इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं.
रामविनय कहते हैं, ‘‘हमलोग फ़ेसबुक और दूसरे वेबसाइट्स से वंचित हैं. ऐसे में लगता है कि हमलोग दुनिया से कटे हुए हैं. पचास साल पीछे हैं.’’

Image copA
इलाक़े में बिजली भी नहीं पहुंची हैं. ऐसे में लगभग हर उस घर में लोग बिजली के लिए सोलर पैनल्स का इस्तेमाल भी करते हैं जिस घर में मोबाइल है.
पिपरा दोन के देवराज महतो बताते हैं कि इलाक़े में मोबाइल के कारण ही सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ा है.

‘इनकमिंग मुफ़्त नहीं'

शहरों में टेलीफोन बूथ अब भले ही न के बराबर दिखाई देते हों लेकिन दोन इलाके में एंटीना के जरिए कुछ लोग ‘टेलीफोन बूथ’ भी चलाते हैं.
मोबाइल टावरImage copyright
वे एक तय राशि लेकर लोगों की बात तो कराते ही हैं. साथ ही ‘इनकमिंग सेवा’ भी मुहैया कराते हैं.
रामनगर की गुलिश्ता खातून पिपरा दोन के सरकारी स्कूल में शिक्षिका हैं.
गुलिश्ता बताती हैं, ‘‘बूथ वालों के नंबर हमने अपने घरवालों को दे रखे हैं. इनके यहां हमारे नाम कोई खास मैसेज आता है तो वे उसे पहुंचाने के एवज में भी पैसे लेते हैं.’’
दोन इलाके के लोगों के मुताबिक कंपनियां तो मोबाइल टावर लगाना चाहती हैं, लेकिन वन विभाग के अधिकारी वन्य जीवों के सुरक्षा के नाम पर इसकी इजाजत नहीं दे रहे हैं.

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