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Monday, 14 December 2015

"या निशा सर्वभूतानं तस्यां जागर्ति सयंमी"

"या निशा सर्वभूतानं तस्यां जागर्ति सयंमी"

अर्थात जब समाज अचेतन होकर नींद में सो जाता है तब योग्य,संयमी अर्थात संवेदनशील गुणी व्यसक्ति सक्रिय जागृत होकर अपने कार्यों को पूर्ण करता है।इसप्रकार स्वकर्तव्यबोध के साथ आगे बढ़ने की आकांक्षा का उत्पन्न होना और उसे परिणाम मूलक कार्य के रूप में करना ही जागरण कहा जाता है। सामान्य भाव में जागरण अँधेरे के विरुद्ध,सुरक्षा का एक संघर्ष है।यह संघर्ष रोशनी की आकाँक्षा को पूर्ण होने तक चलता रहता है।

दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि समाज के साथ संवाद बनाना ही जागरण है।संवाद का निहितार्थ राष्ट्र व समाज के अन्दर उठ रही चुनौतियों का पहचान करना।आज समाज के अन्दर अंधकाररूपी शैतान जो नानाविधि रूपों में सुरसा सदृश्य मुँह फाडे खड़ा है।
वर्षों से हमने हर क्षेत्र में विकास की दिशा की ओर चलने का प्रयास किया है। चाहे वह ज्ञान-विज्ञानं का क्षेत्र हो,औद्योगिक विकास का क्षेत्र हो या सामाजिक-राष्ट्रिय जीवन मूल्यों का क्षेत्र हो।लेकिन अभी भी हम अनेकों  समस्याओं से सतत जूझ रहे हैं।जैसे- अशिक्षा,विपनता,भ्रूण हत्या, जनसंख्या विस्फोट,अतिवाद,माओवाद,आतंकवाद,विदेशी घुसपैठ,अलगाववाद,मादक द्रव्यों का सेवन,नारी सम्मान का संकट व सुरक्षा आदि।सामान्यतः जनसामान्य में यह धारणा है कि इन समस्याओं का समाधान की जिम्मेवारी सिर्फ व सिर्फ सरकार की,व्यवस्था की है।परन्तु इतना कह और सोचकर हम अपने दायित्वों से बच नहीं सकते हैं।अपने कर्तव्यों से मुँह मोड़ नहीं सकते हैं,बल्कि यह फ़र्ज़ बनता है कि हम आगे बढ़कर इसमें भागीदार बने,सहकार करें।
अनेकों संगठन एवम् जागरूक सक्रिय नागरिक इन समस्याओं का निराकरण करने में लगे हैं और कुछ ऐसे भी हैं जिनके पास इन समस्याओं का अनुभव व इसके समाधान का अनूठे उपाय भी है।आज उन्हें अपनी बात रखने व अपने अनुभवजन्य प्रयोगों की साझेदारी करने का एक मंच की आवश्यकता है।निश्चित ही इस रिक्त स्थान को Forum For Awareness Of National Security (FANS) भरने में पूर्ण सक्षम होगा।
व्यवहार व सत्य के परिदृश्य पर यदि देखा जाय,तो जागरण के माध्यम से ही संवेदनशील समाज व सुरक्षित राष्ट्र खड़ा होता हैं और उसी का विकास भी सुनिश्चित है तथा एकता विकसित राष्ट्र-समाज का परिणाम होता है। आजतक विश्व में किसी असुरक्षित व अविकसित राष्ट्र-समाज में एकता परिलक्षित नहीं दिखायी पड़ती है।अतः आज हम जागरण की नींव पर संवेदनाओं से भरा हुआ एक सुरक्षित,विकसित व एकत्रित श्रेष्ठ देश के रूप में स्थापित होने के संकल्प के साथ लक्ष्य की ओर अग्रसर हैं। बरना---
"इस तरह से गर अँधेरे संगठित होते रहे,
रोशनी को मुल्क में नंगा नचाया जाएगा।
सबसे पहले अगरचे कातिल बचाया जायेगा,
सीकन्चों में फिर कोई निर्दोष लाया जाएगा।।"
गोलोक बिहारी राय

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