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“गीता” : एक ‘मानवीय ग्रंथ’ … एक ‘समग्र जीवन दर्शन’ … व ‘मानव समाज की अप्रतिम धरोहर’

            "गीता” का शाब्दिक अर्थ केवल गीत अर्थात् जो गाया जा सके से लिया जाता है । किन्तु आतंरिक रूप से इसका अर्थ है कि जिस...

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Monday, 2 January 2012

भारत वर्ष

भारत वर्ष 
1869-- Milchell 55-s-Asia
British Indian Empire 1909 Imperial Gazetteer of I ndia
               इतिहास साक्षी है , जब विदेशी शक्तियों ने अटोमन साम्राज्य पर आक्रमण कर उसका इतना टुकड़ा कर दिया कि आज इराक है , तुर्की है या एनी छोटे बड़े देश है, पर आज विश्व के मानचित्र से अटोमन साम्राज्य गायब है|कुछ ऐसा ही भारत के साथ हुआ | एक नहीं , दो नहीं, नौ- नौ टुकडे किया गया|फिर भी आज विश्व के नक़्शे पर भारत बचा हुआ है| इसे एक संयोग ही कहे , या ईश्वर की कृपा कहे , या इस भूमि की अपनी सुदृढ़ एवं बलशाली समाज का पुरुषार्थ और सनातन से काल से | चली आ रही गौरवशाली संस्कृति का प्रभाव कहे | १९ शताव्दी के ३० के दशक से जो विभाजन अंग्रेजों ने इस देश का करना शुरू किया वह ७० के दशक तक चलता रहा|अंततः मालद्वीप के विभाजन के साथ रुका | अफगानिस्तान, वर्मा, श्रीलंका, तिब्बत, पाकिस्तान, नेपाल, भूटान , बंगलादेश, और मालद्वीप अलग किया गया |भारत सहित कुल नौ (९) हिस्सों में विभाजित हो गया !  जो भी हो आज भी इन सभी देशों का प्राचीन इतिहास एक ही है, इनके पुरखे, कला,  संस्कृति, साहित्य, ज्ञान- विज्ञानं , एवं सामाजिक उत्सव सब साझे है | न पाकिस्तान कह सकता है कि पाणनी उसके गोद में उत्पन्न नहीं हुए और न भारत कह सकता है कि पाणनी उसके नहीं है |
           अतः जम्बूद्वीप , आर्यावर्त के अन्दर जो भारत वर्ष  था ! वह आज भारत सहित अपनी विकास एवं उन्नति का मार्ग तलास रहा है |जहाँ ज्ञान विज्ञानं और समाज निर्माण की पहली किरण पड़ी | इन सभी देशों का विकास, समृधि, एवं सुरक्षा के लिए शांति अत्यावश्यक है , भारत वर्ष के सांस्कृतिक एकता पर टिकी रह सकती है | भारत वर्ष के सांस्कृतिक एकता और गौरव विश्व को पता है ,जिसे विश्व की महाशक्तियां कभी भी स्वीकार न करेगी | पर इसके साथ यह विस्वाश  भी है कि एक न एक दिन हमारी एकता दृढ़ता के साथ कड़ी होगी , जो विश्व के समृधि व विकास में मार्गदर्शन करेगी |
अग्नि पुराण बड़े ही प्रमाणिक रूप से कहता है कि ...... क्षीरोदधेरूतरम यद् हिमाद्रेश्चैव दक्षिणं !                                                   
                                                                       ज्ञेयं तद भारतं वर्षं सर्वकर्मफलप्रदम !!  (अग्नि पुराण)
       विष्णु पुराण ..........अत्रापि भारतं श्रेष्ठं जम्बूद्वीपे महामुने ! यतो हि कर्मभूरेषा ह्यतोअन्या भोगभूमयः !!
भारत वर्ष ..........अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत, नेपाल, तिब्बत, भूटान, म्यांमार, बंगलादेश ,श्रीलंका, मालद्वीप 
                                    



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