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Sunday, 6 May 2012

भगवान पशुपतिनाथ का भारत भ्रमण--पशुपतिनाथ यात्रा पशुपति से तिरुपति की कैलास से अनुराधापुरम


भगवान पशुपतिनाथ का भारत भ्रमण--पशुपतिनाथ यात्रा
पशुपति से तिरुपति की कैलास से अनुराधापुरम
           हिन्दुओं का प्रसिध्द तीर्थस्थल पशुपति क्षेत्र,काठमांडू से पशुपतिनाथ की प्रतिमूर्ति की झांकी भारत भ्रमण को आने वाली है।दो महिना पूर्व फाल्गुन,२०६८ वि० संओ को पशुपति विकास क्षेत्र कोष,काठमांडू द्वारा सुप्रसिध्द तीर्थस्थल बालाजी तिरुपति से बालाजी की मूर्ति नेपाल दर्शनार्थ लाया गया।और अब पशुपति विकास क्षेत्र कोष, काठामांडू द्वारा पशुपतिनाथ की मूर्ति भारत के विभिन्न तीर्थस्थलों और नगरों के भ्रमण की योजना तैयार कर ली गयी है।
हिन्दुओं का प्रसिध्द तीर्थस्थल पशुपति क्षेत्र,काठमांडू से पशुपतिनाथ की प्रतिमूर्ति की झांकी भारत भ्रमण को आने वाली है।दो महिना पूर्व फाल्गुन,२०६८ वि० संओ को पशुपति विकास क्षेत्र कोष,काठमांडू द्वारा सुप्रसिध्द तीर्थस्थल बालाजी तिरुपति से बालाजी की मूर्ति नेपाल दर्शनार्थ लाया गया।और अब पशुपति विकास क्षेत्र कोष, काठामांडू द्वारा पशुपतिनाथ की मूर्ति भारत के विभिन्न तीर्थस्थलों और नगरों के भ्रमण की योजना तैयार कर ली गयी है|
तिरुपति बालाजी की मूर्ति नेपाल आने के अवसर में काठमांडू में तिरुपति देवस्थानम ट्रस्ट के अध्यक्ष कानुमुरी बापिरा एवं प० वि० क्षे० कोष के सदस्य सचिव नाहटा के बीच पशुपतिनाथ के भारत भ्रमण की बातचीत हुई।पशुपतिनाथ के भारत भ्रमण की व्यवस्था तिरुपति देवस्थानम द्वारा करने के विषय में सविस्तार निरंतर बातचीत चल रही है।इस प्रकार काठमांडू पहुचने में असमर्थ हिन्दुओं की पशुपति दर्शन की इच्छा पूर्ण होगी।
इसके लिए पशुपति मंदिर का सम्पूर्ण प्रारूप तैयार किया जा रहा है।जिसमे भगवान पशुपतिनाथ की प्रतिमा स्थापित रहेगी।जिसको एक विशाल सुसज्जित रथ पर स्थापित कर सम्पूर्ण भारत भ्रमण कराया जायेगा।
                  प्रथम चरण में इस रथ की यात्रा पटना,बाराणसी, मथुरा,वृन्दावन,दिल्ली,मुंबई,सिध्दी- विनायक, तिरुपति बालाजी, कन्याकुमारी,रामेश्वरम,भुवनेश्वर,कोलकत्ता,एवं कामाख्या का भ्रमण संपन होगा।इसके बाद दुसरे चरण की यात्रा की योजना की जाएगी, जिसमे विश्व के अन्य देशों में भ्रमण का भी विचार किया जायेगा।इस यात्रा के सञ्चालन हेतु अनेक स्तरों पर मूर्तिकारों एवं संस्कृतिविदों के साथ बातचीत का क्रम जारी है|
           नाहटा के अनुसार भाद्रपद तक रथ का प्रारूप तैयार कर लिया जायेगा और इस वर्ष के अन्दर ही पशुपतिनाथ की भारत भ्रमण यात्रा संपन्न हो जाएगी।
       पर दुर्भाग्यवश इस गुरु-महत्ति यात्रा पर प्रारंभ होने से पहले ही काले बदल मडराने लगे। वरिष्ठ माओवादी नेता एवं नेपाल सरकार के संस्कृति मंत्री गोपाल किराती का विरोध का स्वर फुट पड़ा। एक साजिश के तहत वे नाहटा को कार्यकाल समाप्ति से पूर्व ही उनको पदभार से मुक्त करा देने का अभियान छेड़ दिया है।
         पर यह पूर्ण विस्वास के साथ कहा जा सकता है कि भगवान पशुपतिनाथ, तिरुपति-बालाजी एवं श्री रामेश्वरम की कृपा से पशुपति से तिरुपति ही नहीं, बल्कि कैलाश (ल्हासा) से अनुराधापुरम तक फिर एक बार अपने पूर्व सांस्कृतिक व सामाजिक एकता के रंग में रंगा लहलहाएगा, दिखाई पड़ेगा।

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