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यादें

यादों का क्या है किसी भी पल ज़हन के द्वार खटखटा देती हैं न सोचती समझती विचारती न ही संकोच करती हैं बिन बुलाए मेहमां सी देहलीज़ पर ...

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Thursday, 27 September 2012

मोहम्मद पर फिल्म बनाना

मोहम्मद पर फिल्म बनाना और कार्टून बनाना वास्तव में आस्था पर चोट है|पर क्या?रामजन्मभूमि पर बाबरी मस्जिद की बोल बोलना आस्थ को लौलुहन करना नहीं है?

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